अगर आप 40 पार कर रहे हैं तो चेक कीजिये पर्सनल फाइनेंस

अगर आप 40 पार कर रहे हैं तो चेक कीजिये पर्सनल फाइनेंस

पर्सनल फाइनेंस के हिसाब से यह महत्वपूर्ण स्टेज है क्योंकि आपके पास 40 की उम्र में भविष्य के लिए योजना बनाने की आजादी और क्षमता है. इस मौके से चूकें नहीं.

 

जब युवा कपल यह जानना चाहते हैं कि उनकी वित्तीय स्थिति कैसी है, मेरा जवाब स्पष्ट होता है: जब आप 40 साल के हो गए तब यह जानकर आप हैरान होंगे कि आपकी वित्तीय स्थिति कैसी है. 40 साल का होना जीवन में अपने आप में अनोखा है. कुछ मिड पॉइंट की तरह यहां तक आपकी आदतें आकार ले चुकी होती हैं. इसके बाद भी नए तौर-तरीके के लिए उनके पास बहुत सी गुंजाईश होती है. यहां हम बता रहे हैं कि अगर आप भी इस उम्र के पास पहुंच चुके हैं तो पर्सनल फाइनेंस की चेकलिस्ट देखिये

 

पहला:         उस चीज को पहचानें जिसने आपके जीवन में बहुत परेशान किया है. यह बीमारी किशोरावस्था से शुरू होती है जब प्रतियोगिता में आप रेस में शामिल होते हैं. इसके बाद जॉब ऑफर, कार, घर, छुट्टियां और इस जैसी तमाम चीजें शामिल हैं. इसके बाद बच्चों, पति/पत्नी, उनके दिखने, मार्क्स और क्षमताओं जैसी चीजें आती हैं. अब आपकी उम्र इन चीजों से छुटकारा पाने की है. आप समय आ गया है जब आप अपनी उपलब्धियों से सीखें, अपने नजरिये से दुनिया को देखें और क्या काम करता है, क्या नहीं जैसे फैसले लेना सीखें. इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह है कि आप यह दिल से जानते हैं कि वास्तव में आपके लिए क्या मायने रखता है. दूसरों के साथ कड़ी प्रतियोगिता की वजह से आपके पास खुशियां और धन बहुत कम बच पाते हैं.

 

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दूसरा:         शेयर बाजार का समय पहचानने की कोशिश ना करें. अगर आपने अब तक इक्विटी में निवेश का फंडा नहीं सीखा है तो आप अपने धन को पेशेवर हाथों में सौंप दें. इंडेक्स फंड, म्यूचुअल फंड और पेशेवर सेवाओं की मदद लीजिये जिससे आपके धन को शेयर बाजार की मदद मिल सके. अगर कॉलेज के ज़माने से ही आप शेयर ट्रेडिंग करते रहे हैं और अब तक पैसे नहीं बना पाए हैं तो आप यह स्वीकार करें कि आपके बस का यह काम नहीं है. या आप इसे पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं. अब आप इससे बाहर निकलें और इस कम को पेशेवर हाथों में सौंप दें.

तीसरा:         निश्चित करें कि आपके पास निवेश करने को लेकर एक सोच हो. इसे लिखें और दोस्त/परिजनों के साथ शेयर करें. इसे लागु करने की योजना बनायें. आईपीओ, बीमा, टैक्स बचत और फंड आपको बहुत दूर नहीं ले जा पाएंगे. अगर अब तक निवेश को लेकर आपके पास कोई सोच नहीं है, तो आप यह मान लीजिये कि निवेश को लेकर अब तक आप कुछ ठोस नहीं कर पाए हैं तो आप अगले 20 साल के हिसाब से रणनीति बनायें.सेविंग और निवेश आदत हैं और इन्हें अनुशासन के साथ अपनाने से आपका रिटायर्ड लाइफ बेहतर बनेगा.

चौथा:        पिछली गलतियों पर पछताने और उसका टेंशन लेने की जगह उसमें सुधार के रास्ते पर काम करें. किसी उपनगर में खरीदी गयी दूसरी या तीसरी संपत्ति को बेचकर मासिक क़िस्त का बोझ घटायें. मामूली रिटर्न देने वाली बीमा पालिसी को बेच दें और उससे जुटाए पैसे को निवेश करें. अगर आपको इस बात पर आश्चर्य है कि अब तक आप पैसे क्यों नहीं जुटा पाए तो आप इस चेतावनी से सबक लें जो रिटायर होने के बाद के जीवन के लिए खतरे की घंटी बन गया है. अगर आप अपनी आमदनी का 30-40 फीसदी नहीं बचा पा रहे हैं तो आप बहुत कम कमा कर बहुत अधिक खर्च कर रहे हैं. इस समस्या को नासूर बनने से पहले रोकिये

 

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पांचवां:         खर्च पर काबू पायें. यह वह समय है जब आप अपने करियर में अच्छी जगह पर होते हैं और आत्मविश्वास से लबरेज होते हैं. लाइफ स्टाइल से समझौता आपको खतरा लगता है. आमदनी बढ़ने के साथ आपके खर्च बढ़ते हैं और लाइफ स्टाइल की आदतें आपकी पर्सनैलिटी को सूट करने लगती हैं. अगर इन पर खर्च आपकी आमदनी की तुलना में अधिक है तो आप फिल्मस्टार सिंड्रोम से ग्रस्त हैं. बुढ़ापे के लिए आपके पास कुछ भी नहीं बचने वाला है. जब भी आपका वेतन बढ़े सुनिश्चित करें कि आमदनी का आधा बचत में जाय.

छठा:         कर्ज से मुक्ति पायें. इस उम्र में आपको अच्छी कमाई होनी चाहिए और उससे आप क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाएं. घर में छोटे बच्चे भी होंगे. शुरुआत में जब कम कमाई की वजह से खर्च पर काबू पाना मुश्किल होता है. कमाई बढ़ने के साथ आप एडजस्ट करना सीखते हैं. बहुत महंगे कर्ज से मुक्ति पाने की कोशिश करें. आपको जब बोनस मिले तो आप उससे ख़ुशी महसूस करें, राहत नहीं. पर्सनल लों लेने से बचें और दोस्तों/परिजनों के बीच भरोसा बहाल करें जिससे छोटा उधार लेना आसान हो.

सातवां:        लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए तैयार हों. अगर आपने दूसरा घर निवेश के हिसाब से नहीं ख़रीदा तो बच्चे की पढ़ाई के वक्त शायद यह काम नहीं आ सके. अगर आपने पढ़ाई में उसकी मदद कर भी तब भी आपको यह पता होना चाहिए कि वह अपना जीवन खुद जियेगा और शायद बुढ़ापे में आपकी मदद नहीं कर सके. अगर आपने रिटायर मेंट के लिए बचत की है तब तो ठीक नहीं तो तुरंत इसकी शुरुआत करें. विस्तृत प्लान बनायें और बचत के हिसाब से लक्ष्य बनायें. आमदनी बढ़ने के साथ बचत भी बढ़ाएं.

आठवां:         सुनिश्चित करें कि आप पैसे के मामले में परिजनों से बात करें. अपने माता-पिता के साथ अपनी पत्नी और बच्चों से भी खुलकर बात करें. उनकी उम्मीदें समझें और अपनी ताकत पहचानें. आमदनी, बचत और खर्च पर चर्चा करें. लंबी अवधि के लक्ष्य बनायें और उन पर काम करें. बच्चों को सेविंग प्लान में शामिल करें. बहुत से लोग 50 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं. पर्सनल फाइनेंस के हिसाब से यह महत्वपूर्ण स्टेज है क्योंकि आपके पास 40 की उम्र में भविष्य के लिए योजना बनाने की आजादी और क्षमता है. इस मौके से चूकें नहीं.

 

courtesy - Uma Shashikant ji and ET

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